The Working Committee meeting of the Jamiat Ulama-i-Hind

The Working Committee meeting of the Jamiat Ulama-i-Hind

Jamiat urges lawmakers to speak on the negative effects of UCC in Parliament,

submits its response to law commission

Won’t tolerate any attempt to target Muslim Personal law, declares Maulana Mahmood Asa’d Madani, President of Jamiat Ulama-i-Hind.

New Delhi, July 10, 2023: The Jamiat Ulama-i- Hind on Monday submitted its response to the Law Commission of India after its executive committee meeting approved it. The Jamiat has warned that if an attempt is made to erase one's identity, it will be akin to removing the proud identity of the country because the country's constitution emphasizes and encourages unity in diversity.

Maulana Mahmood Asad Madani, President of the Jamiat Ulama-i-Hind, presided over the Executive Committee Meeting, where a thorough debate focused particularly on the Uniform Civil Code. Several significant decisions were made in response to the challenge to the Muslim family laws once it was taken into consideration. The earlier , Jamiat's proceedings were read by Maulana Hakimuddin Qasmi, General Secretary of the Jamiat. The Muslim Personal Law is a guarantee and protector of the rights of women; if it is repealed, women would not receive many rights and benefits, said Advocate Maulana Niaz Ahmad Farooqi, who presented a detailed draft of Jamiat’s response to the Law Commission in which it has been highlighted by several pieces of evidence and arguments to buttress the Muslim Personal Law’s claims about women’s rights.

The preamble of the Shariat Application Act of 1937 mentions that Jamiat played a significant role in the application of Muslim Personal Law, which Jamiat President Maulana Madani referred to in his presidential speech on this occasion. Currently, the UCC is focusing on the Muslim Law, particularly with regard to Muslims, which we completely reject and vehemently oppose. According to Maulana Madani, this issue is not only connected to the identity of Muslims but also other faith groups. The attempt to erase one's identity, he said, would be equivalent to removing the proud identity of the country because the country's constitution promotes unity in diversity.

According to Maulana Madani, the country's architects, founders, and ideological leaders promised us at the time of independence that the Muslim Personal Law, which is based on the Holy Quran and reliable Hadiths rather than on any customs, would be constitutionally protected, but today we see threats to it.

Muslims are currently dealing with a really depressing scenario. Muslims will be disappointed if this issue is not resolved, which is not good for the country as a whole.

As a result, after careful study, with certain modifications, the response was submitted to Law Commission of India. The Majlis-e-Amila also made the decision to meet with the President of India on this issue and agreed to write a letter to all chief ministers and party leaders informing them of the unanimity of the Muslim Ummah's position on the Uniform Civil Code. Additionally, it was determined that Muslim and non-Muslim lawmakers from various political parties should be assembled, talked to, and encouraged to speak out against the uniform civil code’s negative effects in the forthcoming parliament session.

In an important decision taken at the meeting, public demonstrations should be avoided, but people from many social strata and powerful figures will be invited to attend representative programs and events arranged at the central and state levels. According to Majlis Amila, the next Friday, July 14, in the context of UCC, will be observed as "Prayer Day."

In the meeting, a proposal was adopted for bifurcating Jamiat Ulama-i-Andhra Pradesh and Telangana into separate units.

The meeting also expressed deep sorrow and grief over the passing of numerous notable individuals, including Maulana Syed Rabey Hasni Nadvi, the president of All India Muslims. Apart from them, Maulana Ghulam Rasool Sheikh Al-Hadith Madrasah Imdadiya Mumbai, Maulana Yahya Nadvi Begosrai, Maulana Alamgir Chaudhary, Haji Nauman, Vice President of Jamiat Ulema Banaras, Haji Abdul Basit and Haji Abdul Kabir Banaras, Maulana Hafiz Nadeem Siddiqui's cousin, Maulana Ashraf's mother were also condoled.

In the meeting, apart from President Jamiat Ulama-i- Hind Maulana Mahmood Madani and Maulana Hakimuddin Qasmi, Maulana Muhammad Salman Bajnoori, Vice President Jamiat Ulama-i- Hind, Maulana Mufti Ahmed Deola, Vice President Jamiat Ulama-i- Hind, Maulana Qari Shaukat Ali Khazan, Maulana Mufti Muhammad Salman Mansoorpuri, Maulana Badruddin Ajmal (MP), Maulana Siddiqullah Chaudhary Calcutta, Maulana Mufti Muhammad Rashid Azmi, Maulana Abdullah Marufi, Haji Muhammad Haroon, Maulana Muhammad Aqil Garhi Daulat, Maulana Mufti Muhammad Affan Mansoorpuri, Mufti Muhammad Javed Iqbal, Maulana Niaz Ahmad Farooqui Advocate, Dr. Masood Azmi, Maulana Sirajuddin Moini Ajmeri Nadvi Dargah Ajmer Sharif, Mufti Iftikhar Qasmi, Mufti Shamsuddin Bijli Karnataka, Maulana Muhammad Nazim Patna, Haji Muhammad Hasan Chennai , Maulana Muhammad Ibrahim Kerala, Maulana Rafiq Mazahari, Maulana Abdul Quddus Palan Puri, Professor Nisar Ahmad Ansari Ahmedabad, Hafiz Ubaidullah, Maulana Yahya Karimi, Maulana Sheikh Muhammad Yahya Baskandi Assam, Mufti Abdul Qadir Assam, Maulana Habib Rehman Allahabad, Qari Ayub Azmi were present.

 

Dear Editor

Please publish this press release and oblige

Niaz Farooqui Secretary Jamiat 9312228470

 

जमीअत उलमा-ए-हिंद की वर्किंग कमेटी की बैठक

- समान नागरिक संहिता के विरुद्ध जमीअत उलमा-ए-हिंद की संयुक्त प्रतिनिधि सभा और संसद सदस्यों की एक विशेष बैठक बुलाने का निर्णय

- जमीअत की ओर से विधि आयोग को जवाब सौंपा गया

- जमीअत उलमा-ए-हिंद की सभी इकाइयां बार कोड के जरिए जनता से उनक मत दाखिल कराने में सक्रिय

- मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को निशाना बनाने का कोई भी प्रयास हमें स्वीकार नहींः जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी

नई दिल्ली, 10 जुलाई, 2023। जमीअत उलमा-ए-हिंद की वर्किंग कमेटी की एक बैठक जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित जमीअत मुख्यालय के मदनी हॉल में आयोजित की गई। बैठक में विशेष रूप से समान नागरिक संहिता पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई और मुस्लिम पारिवारिक कानूनों के समक्ष आने वाली चुनौती का सामना करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इससे पूर्व जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने पिछली कार्यवाही प्रस्तुत की और एडवोकेट मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने जमीअत उलमा-ए-हिंद की ओर से विधि आयोग को दिए जाने वाले जवाब का एक विस्तृत मसौदा पेश किया जिसमें कई तर्कों द्वारा यह साबित किया गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ एक्ट महिलाओं के अधिकारों का वाहक और संरक्षक है, अगर इसे निरस्त कर दिया गया तो महिलाओं को प्रदत्त बहुत से अधिकार और छूट खत्म हो जाएंगी।

इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय भाषण में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि जमीअत उलमा-ए-हिंद ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीअत एप्लीकेशन एक्ट 1937) के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जैसा कि इस अधिनियम की प्रस्तावना में उल्लेखि किया गया है। वर्तमान समय में यूसीसी द्वारा विशेष रूप से मुस्लिम पर्सनल लॉ को निशाना बनाया जा रहा है, जो हमें बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है और हम ऐसे किसी भी प्रयास की कड़ी निंदा करते हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि यह मामला मुस्लिम अल्पसंख्यक की पहचान से जुड़ा है, देश के संविधान ने अनेकता में एकता को केंद्रीय भूमिका में रखा है, इसलिए यदि किसी एक की पहचान को मिटाने का प्रयास किया गया तो यह देश की गौरवपूर्ण पहचान को मिटाने के समान होगा। मौलाना मदनी ने कहा कि देश की आजादी के समय इसके निर्माताओं, संस्थापकों और विचारकों ने हमें आश्वासन दिया था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ, जो किसी प्रथा एवं परंपरा पर नहीं बल्कि पवित्र कुरान और प्रामाणिक हदीसों के आधार पर है, इसका संवैधानिक संरक्षण किया जाएगा, लेकिन आज हम जिस स्थिति का सामना कर रहे हैं, वह बहुत निराशाजनक है। अगर इन परिस्थितियों का समाधान नहीं हुआ तो मुसलमान निराशा का शिकार हो जाएंगे और यह देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

अतः जमीअत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारिणी समिति ने काफी विचार-विमर्श के बाद विशेषज्ञ वकीलों द्वारा तैयार किए गए जवाब को कुछ बदलावों के साथ मंजूरी दी है, जिसे भारत के विधि आयोग के कार्यालय में दर्ज करा दिया गया है। कार्यकारिणी समिति ने इस अवसर पर यह भी फैसला लिया है कि समान नागरिक संहिता के संबंध में मुस्लिम समुदाय के सर्वसम्मत रुख से अवगत कराने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों के अध्यक्षों के नाम पत्र लिखा जाए और भारत के राष्ट्रपति से भी मिलने का प्रयास किया जाए। यह भी निर्णय लिया गया कि विभिन्न दलों से संबंध रखने वाले मुस्लिम और गैर-मुस्लिम संसद सदस्यों को इकट्ठा कर उनसे चर्चा की जाए और उन्हें संसद में समान नागरिक संहिता के नकारात्मक प्रभावों पर आवाज उठाने के लिए सहमत किया जाए। कार्यकारिणी समिति ने अपने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में यह घोषणा की कि सार्वजनिक प्रदर्शनों से बचा जाए, हालांकि केंद्रीय और प्रदेश स्तर पर संयुक्त प्रतितिधि सभाएं आयोजित की जाएंगी जिनमें विभिन्न वर्गों से संबंध रखने वाले लोगों और प्रभावशाली व्यक्तित्व भाग लेंगे। वर्किंग कमेटी ने यह भी घोषणा की है कि यूसीसी के संदर्भ में आगामी 14 जुलाई शुक्रवार को ’यौम-ए-दुआ (प्रार्थना दिवस) के रूप में मनाया जाएगा।

कार्यकारिणी समिति में अन्य मामलों के तहत जमीअत उलमा-आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की वर्किंग कमेटी द्वारा एक प्रस्ताव इन दो राज्यों की इकाइयों को अलग करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे कार्यकारिणी समिति ने स्वीकृति प्रदान कर दी। बैठक में कई महत्वपूर्ण हस्तियों विशेष रूप से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया गया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। उनके अलावा मौलाना गुलाम रसूल शेख-उल-हदीस मदरसा इमदादिया मुंबई, मौलाना याहया नदवी बेगूसराय, मौलाना आलमगीर चौधरी, हाजी नोमान उपाध्यक्ष जमीअत उलमा बनारस, हाजी अब्दुल बासित और हाजी अब्दुल कबीर बनारस, मौलाना हाफिज नदीम सिद्दीकी के चचेरे भाई, मौलाना अशरफ की मां और इमाम कासिम चेयरमैन अल-खैर फाउंडेशन की मौसी आदि के निधन पर भी शोक व्यक्त किया गया। बैठक रविवार की शाम मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी नायब अमीरुल हिंद की दुआ के साथ संपन्न हुई।

बैठक में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी और महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी के अलावा मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी उपाध्यक्ष जमीअत उलमा-ए-हिंद, मौलाना मुफ्ती अहमद देवला उपाध्यक्ष जमीअत उलमा-ए-हिंद, मौलाना कारी शौकत अली कोषाध्यक्ष जमीअत उलमा-ए-हिंद, नायब अमीर-उल-हिंद मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी, मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना सिद्दीकुल्ला चौधरी कोलकाता, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद राशिद आज़मी नायब मोहतमिम दारुल उलूम देवबंद, मौलाना अब्दुल्ला मारूफी दारुल उलूम देवबंद, हाजी मोहम्मद हारून मध्य प्रदेश, मौलाना मोहम्मद आक़िल गढ़ी दौलत, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी, मुफ्ती मोहम्मद जावेद इकबाल किशनगंज, मौलाना नियाज अहमद फारूकी एडवोकेट, डॉ. मसूद आज़मी, मौलाना सिराजुद्दीन मोईनी अजमेरी नदवी दरगाह अजमेर शरीफ, मुफ्ती इफ्तिखार क़ासमी कर्नाटक, मुफ्ती शमसुद्दीन बिजली कर्नाटक, मौलाना मोहम्मद नाज़िम पटना, हाजी मोहम्मद हसन चेन्नई, मौलाना मोहम्मद इब्राहिम केरल, मौलाना रफीक़ मज़ाहिरी, मौलाना अब्दुल कुद्दूस पालनपुरी, प्रो. निसार अहमद अंसारी अहमदाबाद, हाफिज उबैदुल्लाह बनारस, मौलाना याहया करीमी मेवात, मौलाना शेख मोहम्मद याहया बासकंडी असम, मुफ्ती अब्दुल कादिर असम, मौलाना हबीबुर्रहमान इलाहाबाद, क़ारी अय्यूब आज़मी, सऊद अहमद सैयद एडवोकेट ने भाग लिया।

 

اجلاس مجلس عاملہ جمعیۃ علماء ہند
یونیفارم سول کوڈ کے خلاف جمعیۃ علماء ہندکا نمایندہ مشترکہ اجتماع اور ممبران پارلیامنٹ کی خصوصی میٹنگ بلانے کا فیصلہ، جمعیۃ کی طرف سے لاء کمیشن کو جواب داخل
  جمعیۃ علماء ہند کی سبھی یونٹیں بار کوڈ کے ذریعہ عوام سے رائے داخل کرانے میں سرگرم

 مسلم پر سنل لاء کو نشانہ بنانے کی کوئی بھی کوشش ہمیں منظور نہیں : مولانا محمود اسعد مدنی صدر جمعیۃ علماء ہند
 نئی دہلی  ۱۰؍ جولائی۲۰۲۳:  جمعیۃ علماء ہند کی مجلس عاملہ کا اجلاس مولانا محمود اسعد مدنی، صدر جمعیۃ علماء ہند کے زیر صدارت بمقام مدنی ہال ، آئی ٹی او ، نئی دہلی منعقدہوا ، جس میں خاص طور سے یونیفارم سول کوڈ پر تفصیل سے تبادلہ خیال کیا گیا اور مسلم عائلی قوانین کو پیش آمدہ چیلنج کا مقابلہ کرنے کے لیے کئی اہم فیصلے کئے گئے ۔ازیں قبل جمعیۃ علما ء ہند کے جنرل سکریٹری مولانا حکیم الدین قاسمی نے سابقہ کارروائی کی خواندگی کی اورایڈوکیٹ مولانا نیاز احمد فاروقی نے جمعیۃ علماء ہند کی طرف سے لاء کمیشن کو دیے جانے والے جواب کا تفصیلی مسودہ پیش کیا جس میں متعدد دلائل کے ذریعہ ثابت کیا گیا ہے کہ مسلم پرسنل لاء ایکٹ خواتین کے حقوق کا ضامن اور محافظ ہے ، اگر اسے ختم کردیا گیا تو خواتین کو ملنے وا لے بہت سارے حقوق ومراعات سلب ہو جائیں گے ۔                          
اس موقع پر اپنے صدارتی کلمات میں صدر جمعیۃعلماء ہند مولانا مدنی نے کہا کہ جمعیۃ علماء ہند نے مسلم پرسنل لاء ( شریعت ایپلی کیشن ایکٹ 1937 ) کے نفاذ میں اہم کردار ادا کیا تھا جیسا کہ اس ایکٹ کی تمہید میں مذکور ہے ۔ موجودہ وقت میں یوسی سی کے ذریعہ خاص طور پر مسلم پر سنل لاء کو نشانہ بنایا جارہا ہے ، جو ہمیں ہرگز منظور نہیں ہے اور ہم ایسی کسی بھی کوشش کی سخت مذمت کرتے ہیں ۔مولانا مدنی نے کہا کہ یہ مسئلہ مسلم اقلیت کی شناخت سے وابستہ ہے ، ملک کے آئین نے تنوع میں اتحاد کو مرکزی حیثیت دی ہے ، اس لیے اگر کسی ایک کی شناخت کو مٹانے کی کوشش کی گئی تو یہ ملک کی قابل فخر شناخت کو مٹانے کے مترادف ہو گا ۔مولانا مدنی نے کہا کہ آزادیٔ وطن کے وقت ملک کے معماروں ، بانیوں اور نظریہ سازوں نے ہمیں یقین دہانی کرائی تھی کہ مسلم پرسنل لاء جو کسی رسم و رواج پر نہیں بلکہ قرآن مقدس اور مستند احادیث کی بنیاد پر قائم ہے ، اس کی آئینی حفاظت کی جائے گی ، لیکن آج ہم جس صورت حال کا سامنا کررہے ہیں وہ بہت ہی مایوس کن ہے ۔اگر اس صورت حال کا ازالہ نہیں ہوا تو مسلمان مایوسی کا شکار ہو جائے گا اور یہ ملک کے ہرگز اچھی علامت نہیں ہے۔
چنانچہ مجلس عاملہ جمعیۃ علماء ہند نے کافی غور وخوض کے بعد ماہرین وکلاء کی طرف سے تیارہ کردہ جواب کچھ ردو بدل کے ساتھ منظور کیا گیا ، جسے لاء کمیشن آف انڈیا کے دفتر میں داخل کردیا گیا ہے۔ مجلس عاملہ نے اس موقع پر یہ بھی فیصلہ کیا کہ یکساں سول کوڈ کے سلسلے میں امت مسلمہ کے متفقہ موقف سے آگاہ کرنے کے لیے تمام وزرائے اعلی ٰاور سیاسی پارٹیوں کے صدور کے نام خط لکھا جائے اور صدر جمہوریہ ہند سے ملاقات کی بھی کوشش کی جائے ۔یہ بھی طے ہوا کہ مختلف پارٹیوں سے تعلق رکھنے والے مسلم اور غیر مسلم ممبران پارلیامنٹ کو جمع کرکے ان سے مذاکرہ کیا جائے اور ان کو پارلیامنٹ میں یکساں سول کے منفی اثرات پر آواز بلند کرنے پر آمادہ کیا جائے ۔مجلس عاملہ نے اپنے اہم فیصلے میں اعلان کیا ہے کہ سردست عوامی مظاہروں سے گریز کیا جائے ، تاہم مرکزی اور صوبائی سطح پر نمایندہ مشترکہ اجتماعات منعقد کیے جائیں گے جن میں مختلف طبقات سے تعلق رکھنے افراد اور بااثر شخصیات شریک ہوں گی۔مجلس عاملہ نے اعلان کیا ہے کہ یوسی سی کے تناظر میں آئندہ 14؍ جولائی یوم جمعہ ’ یوم دعائ‘ کے طور پر منایا جائے گا ۔
مجلس عاملہ میں دیگرامور کے تحت جمعیۃ علماء آندھرا پردیش و تلنگانہ کی مجلس عاملہ کے ذریعہ ان دو ریاستوں کی یونٹ کو علیحدہ کرنے کی  تجویز پیش ہوئی ، جو کو مجلس عاملہ نے منظور کیا۔ اجلاس میں کئی اہم شخصیات بالخصوص حضرت مولانا سید رابع حسنی ندویؒ سابق صدر آل انڈیا مسلم پر سنل لاء بورڈ کی وفات حسرت آیات پر گہرے رنج و الم کا اظہار کیا گیا اور ان کے لیے ایصال ثواب کا اہتمام کیا گیا ۔ ان کے علاوہ مولانا غلام رسول شیخ الحدیث مدرسہ امدادیہ ممبئی، مولانا یحییٰ ندوی بیگوسرائے ، مولانا عالمگیر چودھری ، حاجی نعمان نائب صدر جمعیۃ علماء بنارس،حاجی عبدالباسط اور حاجی عبدالکبیر بنارس ، چچا زاد بھائی مولانا حافظ ندیم صدیقی، مولانا اشرف کی والدہ اور امام قاسم چیئرمین الخیر فاؤ نڈیشن کی خالہ، وغیرہ کے وصال پر بھی تجویز تعزیت پیش ہوئی ۔ اجلاس اتوار کی شام مولانا مفتی محمد سلمان منصورپوری نائب امیر الہند کی دعاء پر ختم ہو ا ۔
اجلاس میں صدر جمعیۃ علماء ہند مولانا محمود مدنی اور ناظم عمومی مولانا حکیم الدین قاسمی کے علاوہ ، مولانا محمد سلمان بجنوری نائب صدر جمعیۃ علماء ہند ، مولانا مفتی احمد دیولہ نائب صدر جمعیۃ علماء ہند، مولانا قاری شوکت علی خازن جمعیۃ علما ء ہند ،نائب امیرا لہند مولانا مفتی محمد سلمان منصورپوری ، مولانا بدرالدین اجمل، مولانا صدیق اللہ چودھری کلکتہ ، مولانا مفتی محمد راشد اعظمی نائب مہتمم دارالعلوم دیوبند ، مولانا عبداللہ معروفی دا رالعلوم دیوبند، حاجی محمد ہارون مدھیہ پردیش ، مولانا محمد عاقل گڑھی دولت ، مولانا مفتی محمد عفان منصورپوری ، مفتی محمد جاوید اقبال کشن گنج ، مولانا نیاز احمد فاروقی ایڈوکیٹ ، ڈاکٹر مسعود اعظمی ، مولانا سراج الدین معینی اجمیری ندوی درگاہ اجمیر شریف ،مفتی افتخار قاسمی کرناٹک ، مفتی شمس الدین بجلی کرناٹک، مولانا محمد ناظم پٹنہ ، حاجی محمد حسن چنئی، مولانا محمد ابراہیم کیرالہ ، مولانا رفیق مظاہر ی ، مولانا عبدالقدو س پالن پوری ، پروفیسر نثار احمد انصاری احمد آباد، حافظ عبیداللہ بنارس ،مولانا یحیٰ کریمی میوات ، مولانا شیخ محمد یحییٰ باسکنڈی آسام ، مفتی عبدالقادر آسام، مولانا حبیب الرحمن الہ آباد ، قاری ایوب اعظمی ، سعود احمد سید ایڈوکیٹ شریک ہوئے۔
 

 

July 10, 2023


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