Administration will have to take practical ction to end communalism: Maulana Madani

सांप्रदायिकता की समापित के लिए प्रशासन को निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगीः मौलाना मदनी
- मेवात दंगा पीड़ितों के लिए जमीअत के पुनर्वास अभियान की जमीअत अध्यक्ष ने समीक्षा की

- कहा- जरूरतमंदों के कल्याण से हमारा उद्देश्य केवल अल्लाह को खुश करना


नई दिल्ली, 20 सितंबर 2023। जमीअत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने आज मस्जिद कैल गांव, बल्लभगढ़, फरीदाबाद में जमीअत उलमा हरियाणा के पदाधिकारियों से मुलाकात की और मेवात में हुए सांप्रदायिक दंगों के पीड़ितों के लिए जमीअत उलमा-ए-हिंद द्वारा किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। इस अवसर पर जमीअत उलमा, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के महासचिव मौलाना याहया करीमी ने जमीअत अध्यक्ष की सेवा में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर संतोष व्यक्त किया गया। मौलाना मदनी ने कहा कि जमीअत उलमा जरूरतमंदों का कल्याण करने वाला एक परोपकारी संगठन है, हमें अपने पूर्वजों से विरासत में यही मिला है। इसलिए जहां कहीं भी ऐसे लोगों का घर उजड़ता है, किसी को अकारण परेशान किया जाता है, तो हम धर्म और समुदाय के बिना किसी भेदभाव के उनकी मदद करते हैं। इससे हमारा उद्देश्य केवल अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करना होता है। उन्होंने जमाअत के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां तक संभव हो, पीड़ितों की मदद करें और जो अन्यायपूर्ण तरीके से गिरफ्तार हुए हैं, उनके साथ भलाई करें।
मौलाना मदनी ने कहा कि सांप्रदायिकता किसी भी समाज की जड़ों को खोखला कर देती है। हमारी लड़ाई इस सोच के खिलाफ दशकों से जारी है। मौलाना मदनी ने इस बात की सराहना की कि मेवात दंगों के दौरान बहुसंख्यक वर्ग के ऐसे लोग भी सामने आए जिन्होंने हमलावरों को अपने हाथों से रोका, सोहना में सिख समुदाय के लोगों ने मस्जिद की रक्षा की, लेकिन दूसरी ओर यह भी कटु सत्य है कि दंगाइयों ने सोहना, गुरुग्राम, पलवल, होडल और रसूलपुर के इलाकों में मस्जिदों और मुसलमानों की दुकानों पर हमला किया और उन्हें नुकसान पहुंचाया। निराशाजनक यह है कि पुलिस प्रशासन ने ऐसे उपद्रवियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की और वह अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि अगर हमें सांप्रदायिकता और नफरती अपराधों को खत्म करना है तो हमें न्यायपूर्ण कदम उठाने होंगे। मैंने इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है और शांति स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
मौलाना याह्या करीमी ने बताया कि जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने हमारे प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया। हमने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि जमीअत उलमा दंगों के अगले दिन से ही विभिन्न मोर्चों पर काम कर रही है, जिसमें जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी और केंद्र के अन्य सहयोगियों का बड़ा संघर्ष है। उनकी देखरेख में चार प्रकार की समितियां गठित की गई हैं- (1) कानूनी सेल (2) घरों के निर्माण और प्रभावित मस्जिदों की मरम्मत के लिए समिति (3) राशन किट वितरण समिति (4) रेहड़ी इत्यादि का सर्वेक्षण और वितरण आदि से संबंधित कमेटी। अल्लाह का शुक्र है कि गठित की गई राहत समितियों ने संयुक्त रूप से अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार निभाने की कोशिश की। इसलिए होडल, तावड़ू, पलवल, सोहना, रसूलपुर में जिन मस्जिदों को क्षतिग्रस्त किया गया, उनमें से 11 मस्जिदों की मरम्मत जमीअत कर रही है।
इसके अलावा, 50 तिरपाल वितरित किए गए और 10 घरों का पुनर्निर्माण शुरू किया गया। कुल 369 राशन किट वितरित किए गए, 48 खोखों को क्षतिग्रस्त किया गया था, जिनमें से 16 खोखे पुनर्निर्मित हो चुके हैं, 103 रेहड़ियां वितरित की जा चुकी हैं। इसी तरह मुफ्ती मोहम्मद सलीम बनारसी की रिपोर्ट के अनुसार जमीअत उलमा गुरुग्राम की ओर से विभिन्न तरीकों से लगभग 3 लाख 95 हजार रुपये की सहायता की गई। मौलाना याह्या करीमी ने बताया कि हाजी यूनुस और यासिर अराफात ने पलवल और होडल की मस्जिदों के पुनर्वास में स्थानीय स्तर पर कड़ी मेहनत की और प्रशासन के साथ मस्जिदों की रक्षा की।
गिरफ्तार किए गए 330 लोगों में से अब तक 179 लोगों के परिवारों से आवेदन प्राप्त हुए हैं। अल्लाह का शुक्र है कि जमीअत द्वारा नियुक्त वकील ताहिर रोपड़िया के नेतृत्व में 12 सदस्यीय वकीलों की एक टीम के अथक प्रयासों से 51 लोगों को जमानत मंजूर हो चुकी है। आज जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष के साथ मुलाकात के समय जो लोग उपस्थित थे, उनमें से जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी, जमीअत उलमा-ए-हिंद के सचिव मौलाना नियाज अहमद फारूकी, हाफिज़ मोहम्मद आसिम बेंगलुरु, मौलाना गय्यूर अहमद कासमी, मेवात से जमीअत उलमा संयुक्त पंजाब के महासचिव मोहम्मद याह्या करीमी, मौलाना असलम बडीडवी, मुफ्ती मोहम्मद सलीम बनारसी, मौलाना मोहम्मद सलीम साकरस, मौलाना ज़फरुद्दीन, मौलाना उस्मान, मौलाना नासिर, मोहम्मद आलम गुमट और अमन फेलोशिप से हाफिज़ मोहम्मद सलीम फिरोजपुर, मौलाना दिलशाद तावड़ू, हाफिज़ यामीन सोहना इत्यादि शामिल थे।

 
فرقہ پرستی کے خاتمہ کے لیے انتظامیہ کو منصفانہ کارروائی کرنی ہوگی : مولانا مدنی
میوات فساد متاثرین کے لیے جمعیۃ کی بازآبادکاری مہم کا صدر جمعیۃ نے جائزہ لیا
او رکہا کہ ضرورت مندوں کی خیر خواہی سے ہمارا مقصد صرف اللہ کی رضا حاصل کرنا ہے

نئی دہلی ۲۰؍ ستمبر: آ ج جمعیۃ علماء ہند کے صدر مولانا محمود اسعد مدنی نے مسجد کیل گاؤں بلب گڑھ فریدآباد میں جمعیۃ علماء ہریانہ کے ذمہ داروں کے ساتھ ملاقات کی اور میوات میں ہوئے فرقہ وارانہ فساد متاثرین کے لیے جمعیۃ علماء ہند کی جاری جد وجہد کا جائزہ لیا۔اس موقع پر مولانا یحییٰ کریمی ناظم اعلیٰ جمعیۃ علماء ہریانہ پنجاب و ہماچل پردیش نے صدر جمعیۃ کی خدمت میں تفصیلی کارگزاری پیش کی، جس پر اطمینان کا اظہار کیا گیا۔مولانا مدنی نے کہا کہ جمعیۃ علماء ضرورت مندوں کی خیر خواہی کرنے والی جماعت ہے ، ہمیں اپنے بزرگوں سے وراثت میں یہی ملا ہے۔ اس لیے جہاں کہیں بھی ایسے لوگوں کا گھر اجڑتا ہے ، کسی کو نا حق پریشان کیا جاتاہے تو ہم بلاتفریق مذہب اور کمیونٹی ان کی مدد کرتے ہیں۔ اس سے ہمارا مقصد اللہ کی محض رضا حاصل کرنا ہو تا ہے۔انھوں نے جماعت کے ذمہ داروں کو تلقین کی کہ جہاں تک ممکن ہو متاثرہ افراد کی مدد کریں اور جو ناحق گرفتار ہوئے ہیں ، ان کے ساتھ خیر خواہی کریں۔
مولانا مدنی نے کہا کہ فرقہ پرستی کسی بھی سماج کی جڑ کو کھوکھلی کردیتی ہے، ہماری لڑائی اس سوچ کے خلاف دہائیوں سے جاری ہے۔مولانا مدنی نے اس بات کی ستائش کی کہ میوات فساد کے دوران اکثریتی طبقے کے ایسے بھی لوگ سامنے آئے جنھوں نے حملہ آوروں کو اپنے ہاتھوں سے روکا ، سوہنا میں سکھ برادری کے لوگوں نے مسجد کی حفاظت کی، لیکن  دوسری طرف یہ بھی حقیقت ہے کہ شرپسندوں نے سوہنہ، گروگرام ،پلول ، ہوڈل اور رسول پور کے علاقوں میں مسجدوں  اور مسلمانوں کی دکانوںپر حملہ کیا اور ان کو نقصان پہنچایا ۔ افسوس کی بات ہے کہ پولس انتظامیہ نے ایسے عناصر کے خلاف خاطر خواہ کارروائی نہیں کی اور وہ آج بھی آزاد گھوم رہے ہیں۔ مولانا مدنی نے کہا کہ اگر ہمیں فرقہ پرستی اور نفرتی جرائم کا خاتمہ کرنا ہے تو منصفانہ اقدامات کرنے ہوں گے ۔میں نے اس سلسلے میں ریاست کے وزیر اعلیٰ کو بھی خط لکھا ہے او ر امن و امان کے قیام کے لیے ضروری اقدامات کی طرف توجہ دلائی ہے۔
مولانا یحییٰ کریمی نے بتایا کہ صدرجمعیۃ علماء ہند نے ہماری جد وجہد پر اطمینان کا اظہار کیا۔ ہم نے اپنی رپورٹ میں بتایا کہ جمعیۃ علماء فساد کے اگلے دن سے ہی مختلف جہات پر کام کررہی ہے ، جس میں ناظم عمومی جمعیۃ علماء ہند مولانا حکیم الدین قاسمی اور مرکز کے دوسرے ساتھیوں کی بڑی قربانی ہے۔ ان کی نگرانی میں چار طرح کی کمیٹیاں تشکیل دی گئیں (1)لیگل سیل(2)تعمیر مکانات اور متاثرہ مساجد کی مرمت کمیٹی (3)تقسیم راشن کٹ کمیٹی (4)ریہڑی وغیرہ کی سروے اور تقسیم۔الحمدللہ تشکیل شدہ ریلیف کمیٹی نے مشترکہ طور پر اپنے دیگر رفقاء کے ساتھ مل کر مفوضہ ذمے داری کو اپنی بساط کے مطابق نبھانے کی کوشش کی چنانچہ ہوڈل،تاؤڑو،پلول،سوہنہ، رسول پور میں جن مساجد کو نقصان پہنچایا گیا ، ان میں سے 11 مساجد میں مرمت جمعیۃ کررہی ہے۔
اس کے علاوہ  50 ترپال تقسیم کیے گئے اور 10 مکانات کی تعمیر نو شروع کی گئی ۔مجموعی طور پر 369 راشن کٹس تقسیم کی گئیں،  48کھوکھوں کو نقصان پہنچایا گیا جن میں سے 16 کھوکھے تیار ہو چکے ہیں، 103 ریہڑیاں تقسیم کی جا چکی ہیں۔اسی طرح مفتی محمد سلیم بنارسی کی رپورٹ کے مطابق جمعیۃ علماء گروگرام کی طرف سے مختلف طریقوں سے تقریباً تین لاکھ پچانوے ہزار روپے کی امداد کی گئی۔ مولانا یحیی ٰ کریمی نے بتایا کہ حاجی یونس اور یاسر عرفات نے پلول اور ہوڈل کی مساجد کی بازآبادکاری میں مقامی سطح پر کافی محنت کی اور انتظامیہ کے ساتھ مساجد کی حفاظت کی ۔
330 گرفتار شدگان میں سے اب تک 179 افراد کے اہل خانہ کی طرف سے درخواستیں موصول ہوئی ہیں ، الحمدللہ جمعیۃ کے مقرر کردہ وکیل طاہر روپڑیا کی سربراہی میں 12 رکنی وکلاء کی ٹیم کی انتھک کوششوں سے51 افراد کی ضمانت منظور ہو چکی ہے۔آج صدر جمعیۃ علماء ہند کے ساتھ ملاقات کے وفد جو شخصیات موجود تھیں، ان میں مولانا حکیم الدین قاسمی ناظم عمومی جمعیۃعلماء ہند، مولانا نیاز احمد فاروقی سکریٹری جمعیۃ علماء ہند، حافظ محمد عاصم بنگلور، مولانا غیوراحمد قاسمی، میوات سے محمد یحییٰ کریمی ناظم اعلیٰ جمعیۃ علماء متحدہ پنجاب،مولانا اسلم بڈیڈوی ، مفتی محمد سلیم بنارسی، مولانا محمد سلیم ساکرس، مولانا ظفر الدین ، مولاناعثمان، مولانا ناصر، محمد عالم گمٹ اور امن فیلوشپ سے حافظ محمد سلیم فیروز پور نمک، مولانا دلشا د تائوڑو، حافظ یامین سوہنہ وغیرہ شامل تھے۔
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Sept. 20, 2023


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